jaunpur : कहीं सेहत न खराब कर दें मीठे आम


जौनपुर। मीठे आम किसे पसंद नहीं हैं, लेकिन जिले भर के  बाजारों में बिक रहे ये आम की सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। इन आमों को जल्दी पकाने के लिए रसायनों का प्रयोग किया गया है। आम को जल्द पकाने और आकर्षक बनाने के लिए एसीटिलीन, कैल्शियम कार्बाइड, एथनाल जैसे घातक रसायनों का प्रयोग हो रहा है, जो कि सेहत के लिए काफी खतरनाक हैं। मुनाफाखोर अपने फायदे के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।  आम तौर पर आम के पकने का समय 15 जून के बाद होता है, लेकिन मोटी कमाई के चक्कर में मुनाफाखोर रसायनों का प्रयोग पहले ही पके आम बाजार में उतार देते हैं। कुछ दिन पूर्व आई आंधी के चलते पेड़ों से आम कच्चा ही टूटकर गिर गया। यह वही आम है जो बाजार में इन दिनों नजर आ रहा है। उनमें ज्यादातर कैल्शियम कार्बाइड से पकाए गए हैं। जिसमें आर्सेनिक और गंधक जैसे जहरीले तत्व होते हैं। इसके अतिरिक्त इसे जब पानी में घोला जाता है तब यह एसिटिलीन गैस छोड़ता है। ये तीनों तत्व शरीर के लिए घातक होते हैं। रसायन का प्रयोग करने से आम में मौजूद विटामिन ए के गुण भी समाप्त हो जाते हैं। रसायनों का प्रयोग कर पके हुए आम का सेवन करने के दौरान रस के साथ 30 फीसदी जहर भी हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है। अधिक दिनों तक सेवन से सिरदर्द, चक्कर, उल्टी, दस्त, फोड़े फुंसी जैसी दिक्कतें हो रही हैं। इसके अलावा इससे याददाश्त जाने, कैंसर, अनिद्रा, लीवर, किडनी में सूजन और आंतों में भी संक्रमण पैदा होने का खतरा होता है।   आम को पकाने के लिए छिलके पर कैल्शियम कार्बाइड लगाया जाता है। यह एक से दो दिन तक रखा जाता है, जिससे रसायन के काफी अंश छिलके के अंदर भी प्रवेश कर जाते हैं। ऐसे में छिलके के साथ आम का सेवन करने से रसायन भी शरीर के अंदर प्रवेश कर जाता है। प्रतिबंध के बावजूद भी मुनाफाखोर आम को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का प्रयोग कर रहे हैं। इस पर पूरे देश में प्रतिबंध है। प्रतिबंध के बाद भी मुनाफाखोर धड़ल्ले के साथ फलों को पकाने में इस रसायन का प्रयोग कर रहे हैं। लोगों के सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। आम को पकाने के लिए सबसे पहले उसे अच्छी तरह पानी से धो लें, फिर कागज में उन्हें अच्छी तरह से लपेटकर सामान्य तापमान पर किसी भी गत्ते के डिब्बे, बर्तन या जार में रख दें। चार से पांच दिन में आम पककर तैयार हो जाएगा। आम को बाजार से खरीदकर लाने के बाद पानी में डाल देना चाहिए। कम से कम चार पांच घंटे तक फल पानी में डूबा रहे और तीन बार पानी बदलना चाहिए। इससे रसायन का प्रभाव लगभग खत्म हो जाता है।

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