(सोहराब)
जौनपुर, 02 अक्टूबर 2026। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर शुक्रवार को जनपद न्यायालय परिसर, जौनपुर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण, प्रभात फेरी तथा ‘‘गांधीवादी दृष्टिकोण एवं मध्यस्थता (विवाद से संवाद तक)’’ विषय पर विधिक संगोष्ठी आयोजित की गई।
कार्यक्रम में जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जौनपुर श्री सुशील कुमार शशि ने गांधी जी की प्रतिमा का फीता काटकर अनावरण किया और प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए तथा रामधुन एवं भजन का गायन हुआ।
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार पाक्सो अधिनियम-2012 के प्रति जागरूकता एवं राष्ट्र के नाम मध्यस्थता अभियान-3.0 के प्रचार-प्रसार के लिए प्रभात फेरी भी निकाली गई। नेहरू बालोद्यान सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जौनपुर के विद्यार्थियों की प्रभात फेरी को जनपद न्यायाधीश ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
‘विवाद से संवाद तक’ पर हुई संगोष्ठी
जनपद न्यायाधीश की अध्यक्षता में ‘‘गांधीवादी दृष्टिकोण एवं मध्यस्थता (विवाद से संवाद तक)’’ विषय पर विधिक संगोष्ठी आयोजित हुई। इसमें वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, टीडी लॉ कॉलेज एवं उमानाथ सिंह लॉ कॉलेज, जौनपुर के विधि छात्रों ने प्रतिभाग किया।
संगोष्ठी में दीवानी न्यायालय अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अवधेश कुमार सिंह, मंत्री मनीष कुमार सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश प्रताप सिंह, प्रेमशंकर मिश्र, जयप्रकाश सिंह, अब्दुल हक, दीपचन्द्र राम, ब्रजभूषण सिंह सहित अन्य अधिवक्ताओं ने मध्यस्थता की उपयोगिता और गांधीवादी विचारधारा पर अपने विचार रखे।
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अवधेश सिंह ने कहा कि अधिवक्ता केवल विधि व्यवसायी नहीं, बल्कि समाज का प्रहरी भी है। वरिष्ठ अधिवक्ता जयप्रकाश सिंह ने रामायण एवं महाभारत काल में अंगद और भगवान श्रीकृष्ण द्वारा किए गए संवाद एवं मध्यस्थता के उदाहरणों का उल्लेख किया।
जनपद न्यायाधीश ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में परिवार एवं समाज में बुजुर्गों द्वारा मध्यस्थता के माध्यम से विवादों के समाधान में निभाई जाने वाली भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण का प्रभावी माध्यम है। इससे पक्षकारों को सस्ता, सुलभ और शीघ्र न्याय प्राप्त करने में मदद मिलती है। मध्यस्थता के माध्यम से विवाद का समाधान होने पर किसी पक्ष की हार या जीत नहीं होती, बल्कि आपसी संबंधों को बनाए रखने का अवसर मिलता है।
चार दशक से अधिक पुराने मामलों के निस्तारण पर सम्मान
कार्यक्रम के दौरान जौनपुर में चार दशक से अधिक पुराने मामलों को मध्यस्थता के माध्यम से निस्तारित कराने में योगदान देने वाले न्यायिक अधिकारी श्रीमती दिव्या भारती, वरिष्ठ अधिवक्ता वशिष्ठ नारायण शुक्ला, शीतला प्रसाद सिंह, विकास शुक्ला अधिवक्ता तथा मध्यस्थ श्री सैय्यद जरगाम अहसन को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं संबंधित पक्षकारों को महात्मा गांधी का चित्र प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय प्रीति श्रीवास्तव, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार यादव प्रथम, नोडल अधिकारी मध्यस्थता अभियान, रणजीत कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट एवं नोडल अधिकारी लोक अदालत, लालचन्द्र गुप्ता, अध्यक्ष स्थायी लोक अदालत, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्वेता यादव, सिविल जज सीडी/एफटीसी सौरभ श्रीवास्तव सहित न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, मध्यस्थ, लीगल एड डिफेंस काउंसिल, पैनल अधिवक्ता, कर्मचारी एवं पीएलवी मौजूद रहे।


