jaunpur : प्रतिबन्ध के बावजूद खुलेआम बिक रही पालीथीन

जौनपुर। शहर ही नहीं जिले भर  में भी पॉलीथीन का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। जबकि सरकार तीन वर्ष पूर्व अध्यादेश लाकर इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा चुकी है। लेकिन इस संदर्भ में जहां संबंधित अधिकारी उदासीन बने हुए हैं वहीं आमजन अपने कर्त्तव्यों से विमुख। दरअसल पॉलीथीन मामले में अफसर कार्यवाही करें भी तो प्रक्रिया इतनी लंबी और पेचीदा है कि सालों बाद उनकी कार्यवाही का असर होगा। ऐसे में हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद प्रदेश सरकार द्वारा आनन -फानन बनाया गया यह अध्यादेश वर्तमान में आधा आदेश साबित हो रहा है। जिसका न कहीं कोई असर न किसी को कोई डर। हां, कागजों में प्रदेश में पॉलीथीन जरूर बैन है। ज्ञात हो कि वर्ष 2015 में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को पॉलीथीन पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद सरकार अध्यादेश ले आई लेकिन, इससे भी प्रदेश के सभी जिलों में पुलिस, प्रशासन और प्रदूषण विभाग की टीमों ने छापेमारी शुरू कर दी थी। शहर से तो पॉलीथीन जैसे गायब हो गई लेकिन, वक्त के साथ अफसर सुस्त हुए और आज ऐसा कोई दुकानदार, होटल, रेस्टोरेंट, सब्जी विक्रेता नहीं जो पॉलीथीन का प्रयोग न कर रहा हो। 22 दिसंबर 2015 को प्रदेश सरकार ने अध्यादेश लागू किया। जिसके बाद प्रशासन, पुलिस और प्रदूषण विभाग ने प्रदेश के सभी जिलों में अधिकृत इकाइयों, फैक्ट्रियों में पॉलीथीन निर्माण को बंद करा दिया था।   अध्यादेश लाकर प्रदेश सरकार ने पॉलीथीन का निर्माण करना, बेचना और खरीदना या ऐसे किसी उत्पाद का प्रयोग करने पर प्रतिबंध लगा रखा है। पॉलीथीन का प्रयोग, बनाने या बेचने वाले व्यक्ति पर एक लाख जुर्माना और पांच साल तक कैद हो सकेगी।  केंद्र सरकार के कानून के मुताबिक देश में 50 माइक्रान तक की पॉलीथीन का प्रयोग किया जा सकता है। चूंकि यह केंद्र सरकार का कानून है इसलिए इसकी भी अनदेखी नहीं की जा सकती।

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