मनुष्य का अहंकार होता है उसके विनाश का कारणः नीलम गायत्री

जौनपुर। जनपद के तेजी बाजार क्षेत्र के केवटली गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत गीता सम्मेलन में श्रद्धालुओं के बीच चित्रकूट से पधारीं नीलम गायत्री ने कहा कि अहंकार व घमण्ड विनाश का सबसे बड़ा कारण है। रावण जैसा पंडित विद्वान जो सम्पूर्ण नीतियों का ज्ञाता था, फिर भी अहंकार के मद में चूर उसने उनका पालन नहीं किया। उनका सम्पूर्ण कुल खानदान सहित सम्पूर्ण विनाश हो गया। दूसरों की बुराइयां देखने से पहले हमें स्वयं अपनी बुराइयों को दूर करने का प्रयास करना चाहिये। ‘हम सुधरे तो जग सुधरा’ की तर्ज पर हमको सिर्फ अपने आपको सुधारने का प्रयास करना चाहिये। दूसरों के कर्मों का फल देने वाला ईश्वर है। दूसरों के कुकर्म बुराइयां पर दण्ड देने वाले का प्रयास करना हमारे लिये घातक हो सकता है। हमें इससे बचना होगा। ईश्वर अपने भक्तों के कल्याण के लिये कार्य करते हैं। भक्तों की बड़ी-बड़ी कठिनाइयों को ईश्वर टाल देते हैं। विपत्ति के समय भगवान श्रीकृष्ण स्वयं प्रकट होकर द्रोपदी की सहायता किये थे। अपराध व अपराधियों के संहार के लिये भगवान स्वयं पृथ्वी पर अवतार लेते हैं। इस दौरान अयोध्या से पधारे निर्मल शरण ने कहा कि भारतीय संस्कृति से हमें दया, दान, धर्म जैसी चीजें मिलती हैं जो किसी दूसरी संस्कृति में संभव नहीं है। इस अवसर अखिलेश मिश्रा, आयोजक सावित्री मोदनवाल, नन्द लाल प्रधान, अनिल जायसवाल, शुभम सिंह, हरिशंकर शुक्ला, शिवकुमार, खजांची लाल, रमेश जायसवाल, दीनानाथ सिंह, अशोक कुमार, सुभाष चन्द्र सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित थे।

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