NGT के आदेश के बावजूद हादसे जारी, मुख्यमंत्री से अलग कठोर कानून बनाने की मांग
( सोहराब )
जौनपुर, 10 सितंबर। प्रतिबंधित चाइनीज, नायलान, सिंथेटिक एवं नॉन-बायोडिग्रेडेबल मांझे से लगातार हो रही मौतों और गंभीर दुर्घटनाओं को लेकर अधिवक्ता विकास तिवारी एवं अतुल सिंह के नेतृत्व में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। ज्ञापन के जरिए प्रतिबंधित मांझे के निर्माण, बिक्री, भंडारण और उपयोग पर प्रभावी रोक के साथ कठोर एवं अलग कानून बनाए जाने की मांग की गई।
ज्ञापन में कहा गया कि पतंग उड़ाना देश की परंपरा और संस्कृति का हिस्सा है, लेकिन जानलेवा मांझा अब आम नागरिकों के जीवन के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने 11 जुलाई 2017 को नायलान, सिंथेटिक एवं गैर-जैव अपघटनीय मांझे के निर्माण, बिक्री, भंडारण, खरीद और उपयोग पर रोक के स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसके बावजूद प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है।
जौनपुर में कई हादसों का हवाला
ज्ञापन में जौनपुर में प्रतिबंधित मांझे से हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा गया कि 11 दिसंबर 2025 को शिक्षक संदीप तिवारी तथा 14 जनवरी 2026 को डॉ. समीर हाशमी की मांझे से गर्दन कटने के कारण मौत हो गई। इसके अलावा पिछले दस महीनों में दो दर्जन से अधिक लोगों के गंभीर रूप से घायल होने का दावा किया गया है। 6 सितंबर 2026 को सुजल मौर्य एवं उनके भाई सानू मौर्य भी प्रतिबंधित मांझे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हुए।
ज्ञापनकर्ताओं ने कहा कि 12 जनवरी 2026 को संबंधित अधिकारियों को प्रतिबंधित मांझे के संबंध में विधिवत नोटिस दिए जाने के बावजूद दो दिन बाद डॉ. समीर हाशमी की मौत होना बेहद गंभीर विषय है। जिलाधिकारी स्तर से कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बाद भी यदि घटनाएं लगातार जारी हैं तो स्पष्ट है कि केवल कागजी आदेश और मौसमी अभियान पर्याप्त नहीं हैं।
“पतंग उड़ती रहे, लेकिन किसी की जिंदगी न कटे”
अधिवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि उनकी लड़ाई पतंग उड़ाने की परंपरा के खिलाफ नहीं, बल्कि उस जानलेवा मांझे के खिलाफ है, जो सड़क पर चलते किसी निर्दोष नागरिक की जान ले सकता है। उन्होंने कहा, “पतंग उड़ती रहे, लेकिन किसी की जिंदगी न कटे।”
ज्ञापन में प्रतिबंधित मांझे के निर्माण, परिवहन, बिक्री, भंडारण और उपयोग पर कठोर दंड, पूरे आपूर्ति तंत्र की जांच, ऑनलाइन बिक्री पर प्रभावी रोक तथा प्रत्येक थाना क्षेत्र में स्थायी निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की गई।
अतुल सिंह ने कहा कि अब किसी अगली मौत का इंतजार नहीं किया जा सकता। सरकार को प्रतिबंधित मांझे के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करते हुए नागरिकों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।
इस अवसर पर विकास तिवारी, अतुल सिंह, डॉ. अब्बासी, अंकित यादव, आशीष शुक्ल, सुधांशु सिंह, रंजीत यादव, भैया लाल यादव, देवेश मौर्य, नीरज पाठक समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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