जौनपुर। जनपद के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की स्थिति इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। एक ओर जहां शिक्षक बच्चों के भविष्य निर्माण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं, वहीं दूसरी ओर उन पर लगातार बढ़ते गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ भी डाला जा रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल एक प्रतीकात्मक चित्र में शिक्षक को “सर्व शक्तिमान” के रूप में दिखाया गया है, जिसके कई हाथों में अलग-अलग जिम्मेदारियां हैं। इनमें एसएमसी बैठक, मिड-डे मील (MDM) निगरानी, बीएलओ ड्यूटी, जनगणना, स्वच्छता अभियान, आधार कार्य, परीक्षा ड्यूटी, सर्वे, यूनिफॉर्म व पुस्तक वितरण, हाउसहोल्ड सर्वे, स्मार्ट ग्रांट, आईसीटी जैसे कई कार्य शामिल हैं।
शिक्षकों का कहना है कि इन सभी कार्यों के चलते वे अपने मूल दायित्व यानी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने पर पूरा ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। उनका मानना है कि यदि उन्हें गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाए, तो वे शिक्षा के स्तर को और बेहतर बना सकते हैं।
शिक्षक संगठनों द्वारा भी समय-समय पर यह मांग उठाई जाती रही है कि शिक्षकों को केवल शिक्षण कार्य तक सीमित रखा जाए। उनका कहना है कि “शिक्षक एक, कार्य अनेक” की वर्तमान स्थिति में शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है।
शिक्षकों ने प्रशासन और सरकार से अपील की है कि उनकी पीड़ा को समझा जाए और गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ कम किया जाए, ताकि वे पूरी निष्ठा के साथ अपने मुख्य कार्य—शिक्षण—पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
निष्कर्ष:
यदि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों से राहत दी जाती है, तो निश्चित ही देश की शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होगी और “नए भारत” के निर्माण का सपना साकार हो सकेगा।
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