टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का बिगुल, 26 फरवरी को बीएसए कार्यालय पर महाधरना

( सोहराब )
जौनपुर, 20 फरवरी। टीईटी अनिवार्यता के विरोध में जनपद के शिक्षक संगठनों ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। मंगलवार को टीएफआई के बैनर तले विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की।
शिक्षक नेताओं ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों ने उस समय लागू समस्त अर्हताओं एवं प्रशिक्षण को पूरा कर विधिवत नियुक्ति प्राप्त की थी। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1 सितंबर 2025 को दिए गए निर्णय के बाद पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर भी टीईटी अनिवार्य किया जाना उनके सेवा अधिकारों के साथ अन्याय है। इस निर्णय से शिक्षकों में व्यापक असंतोष और रोष व्याप्त है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि आरटीई एक्ट 2017 में किए गए संशोधन को निरस्त करते हुए अध्यादेश लाकर वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। साथ ही सरकार शिक्षकों का पक्ष सर्वोच्च न्यायालय में प्रभावी ढंग से रखे तथा एनसीटीई के माध्यम से हलफनामा दाखिल कर शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित कराए।
शिक्षक संगठनों ने आंदोलन की रूपरेखा जारी करते हुए बताया कि 22 फरवरी को दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक ट्विटर महाअभियान चलाया जाएगा। इसके बाद 23 से 25 फरवरी तक शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे। 26 फरवरी को दोपहर 1 बजे से समस्त शिक्षक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर महाधरना देंगे। इसके उपरांत बीएसए कार्यालय से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकालकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा जाएगा।
ज्ञापन देने वालों में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अरविंद शुक्ला, जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. अतुल प्रकाश यादव, विशेष बीटीसी शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राममूरत यादव, यूटा के जिलाध्यक्ष डॉ. हेमंत सिंह सहित विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
शिक्षक नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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