भारतीय संस्कृति की अनुपम धरोहर है योगः डा. विनोद


जौनपुर। जाति, धर्म, मजहब व देश की सीमाओं के परे सर्वे भवन्तु सुखिनः की भावनाओं को समाहित किये वैश्विक स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना चुकी प्राचीनतम विद्या योग भारतीय सभ्यता व संस्कृति की अमूल्य धरोहर है जिसे हर किसी को अपनाकर पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तान्तरित करना चाहिये। उक्त बातें पतंजलि योग समिति के तत्वावधान में नगर के टीडी इण्टर कालेज में चल रहे योग शिक्षक प्रशिक्षण में बकौल मुख्य अतिथि नगर के टीडीपीजी कालेज के प्राचार्य डा. विनोद सिंह नें कही। इसी क्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे रत्न विशेषज्ञ संदीप पाण्डेय ने बताया कि स्वस्थ व खुशहाली का पर्याय बन चुकी योग का निरन्तर अभ्यास साधना को उच्चतम स्तर तक पहुंचा सकता है। सुबह-शाम चल रहे शिविर में एक्यूप्रेशर, आहार-विहार, योग सूत्र समेत योग के विविध प्रकार प्रकारों को बताते सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, त्रिकोणासन, वृक्षासन, ध्रुवआसन, पादहस्तासन, योगनिद्रा, वीरभद्रासनों, ध्यान का विशेष अभ्यास कराया जा रहा है। इस अवसर पर प्रान्तीय सह प्रभारी अचल हरीमूर्ति, डा. ध्रुवराज योगी, विद्याधर राय विद्यार्थी, मोहन सिंह, लाल बहादुर योगी, कुलदीप योगी, बाबा जयराम, इन्द्रभानु मौर्य, मुन्नर राम आदि मौजूद रहे।

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