
इसके पीछे तर्क ये दिया जा रहा है कि जानवरों का रिकॉर्ड रखने में आसानी होगी। साथ ही इन जानवरों की बीमारियों से बचाने के संबंध में भी कामयाबी मिलेगी। संभव ये भी है कि इस योजना को कार्यान्वित करने के लिए कुछ टीम को उत्तराखंड भेजा जाए और इस योजना की पूरी जानकारी हासिल की जाए। फिलहाल, इसकी जिम्मेदारी राज्य पशुधन को सौंपी गई है। इसकी देख-रेख नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड करेगा। यदि सबकुछ ठीक रहा तो जानवरों का आधार कार्ड बनवाने का काम जुलाई के दूसरे हफ्ते से शुरू हो जाएगा।
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