टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ कलेक्ट्रेट में उमड़ा शिक्षकों का हुजूम, दिखाई ताकत
सेवारत शिक्षकों को टीईटी से मुक्त करे सरकार : अमित सिंह
जौनपुर।
अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में सेवारत शिक्षकों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष व प्रांतीय संयुक्त मंत्री अमित सिंह के नेतृत्व में शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया।
सभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष अमित सिंह ने कहा कि "बीस–पच्चीस वर्ष सेवा देने वाले शिक्षकों को अचानक दो वर्ष के भीतर टीईटी पास करने का आदेश देना अव्यावहारिक और अन्यायपूर्ण है।" उन्होंने कहा कि 56 वर्ष की उम्र में प्रतियोगी परीक्षा पास करने की शर्त लगाना शिक्षकों का शोषण है। भर्ती के समय पूरी पात्रता पूरी करने के बाद सेवा में आए शिक्षकों से दोबारा योग्यता साबित करने की मांग असंवेदनशील है।
अमित सिंह ने केंद्र सरकार व एनसीटीई द्वारा 2017 के आरटीई संशोधन को "शिक्षकों से छल" बताया। उन्होंने कहा कि इस संशोधन को आधार बनाकर 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टेट की अनिवार्यता थोपना अन्याय है।
सभा के बाद शिक्षकों ने "काला कानून वापस लो", "टीईटी अनिवार्यता खत्म करो", "रोज़ी-रोटी पर न हो प्रहार" जैसे नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा।
इस मौके पर माध्यमिक शिक्षक संघ, अटेवा, टीएसटीसी समेत विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी व हजारों शिक्षक मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन जिला मंत्री सतीश पाठक ने किया।
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