संग तें जती कुमंत्र ते राजा, मान ते ग्यान पान तें लाजा

संग तें जती कुमंत्र ते राजा, मान ते ग्यान पान तें लाजा
शूपर्णखा का उपदेश सुनकर रावण की उड़ी नींद
सुइथाकला, जौनपुर। स्थानीय विकास खण्ड स्थित जय मां काली रामलीला समिति जमौली द्वारा आयोजित रामलीला में शूपर्णखा-रावण संवाद से सीताहरण तक की भावमयी लीला का मंचन किया गया। शूपर्णखा-रावण संवाद, रावण-मारीच संवाद, मारीच का माया मृग बनना, सीता हरण आदि की लीला देखकर लोग भाव—विभोर हो गये। खर दूषण समेत राक्षसों के वध का समाचार लेकर शूर्पणखा दशकंधर के दरबार में पहुंची और क्रोध से युक्त वाणी में रावण से नीति की बातें करती हुई बोली— हे दशानन! मदिरा पान करके दिन-रात पड़ा सोता रहता है। तुझे खबर नहीं है कि शत्रु तेरे सिर पर खड़ा है। नीति के बिना राज्य और धर्म के बिना धन प्राप्त करने से, भगवान को समर्पण किए बिना उत्तम कर्म करने से और विवेक उत्पन्न किए बिना विद्या पढ़ने से परिणाम में श्रम ही हाथ लगता है। विषयों के संग से संन्यासी, बुरी सलाह से राजा, मान से ज्ञान, मदिरा पान से लज्जा नष्ट हो हो जाती है। अन्त में शूर्पणखा रावण को नीति का उपदेश देती हुई कहती है कि दशानन! शत्रु, रोग, अग्नि, पाप, स्वामी और सर्प को छोटा करके नहीं समझना चाहिए। ऐसा कहकर शूर्पणखा अनेक प्रकार से विलाप करके रोने लगी। शूपर्णखा की नीति की बातें सुनकर रावण चिंता मग्न होकर विचार करने लगा। खर दूषण हमारे समान ही बलशाली थे। परमात्मा के बिना उन्हें कोई दूसरा नहीं मार सकता था। रामलीला मंचन में अभिनय व सक्रियता से सहयोग करने वालों में अध्यक्ष धीरेन्द्र सिंह, दीपक सिंह, गणेश शर्मा, कमलेश विश्वकर्मा, शहाबुद्दीन, जसवंत राव, अभी यादव, सूरज दुबे, विशाल खरवार, नीरज सिंह, भोला यादव, आयुष यादव, इमरान खान, प्रतीक सिंह, साहस सिंह, अमन विश्वकर्मा आदि शामिल रहे।

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