खून की कमी से जूझ रही जननी,प्रशासन उदासीन

जौनपुर। नारी सशक्त तो समाज स्वस्थ, मौजूदा परिदृश्य में महिलाओं के स्वास्थ्य पर गौर करें तो यह अवधारणा कमजोर पड़ती दिख रही है। एक सर्वे के अनुसार जनपद में 40 से 50 फीसद तक गर्भवती महिलाएं रक्त की कमी से जूझ रही हैं।  प्रसूताओं के स्वास्थ्य को लेकर जननी सुरक्षा योजना, जननी शिशु सुरक्षा योजना आदि संचालित हैं। इन योजनाओं के तहत गर्भवतियों का तो ख्याल रखा जाता है। साथ ही उन्हें दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन की स्थिति देखी गई तो 40 फीसद से अधिक में रक्त की कमी मिली। बताया गया है कि कई महिलाओं की स्थिति तो ऐसी थी, जिनमें रक्त की मात्रा बेहद न्यूनतम स्तर पर थी। प्रसव के समय अधिकतर को रक्त चढ़ाने के लिए सलाह दी गई। विशेषज्ञ कहते हैं कि एक रोग शरीर में अधिक समय रहे तो दूसरे पनपने की आशंका अधिक हो जाता है। गर्भवती महिलाओं के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। जिन महिलाओं में काफी समय से खून की कमी बनी हुई थी, उनमें बुखार, थकान, कमजोरी, सिर दर्द जैसी समस्याएं भी देखने को मिलीं। चिकित्सकों ने बताया कि अधिक समय तक हीमोग्लोबिन की अल्पता रहने की वजह से परेशानी बढ़ने की संभावना रहती है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि स्वस्थ मां से स्वस्थ बच्चा जन्म लेगा। इसलिए सरकार का प्रयास है कि गर्भवतियों के स्वास्थ्य का ख्याल विशेषकर रखा जाए। सर्वे में जिन महिलाओं में रक्त की कमी मिली। उन्हें खान-पान सुधार की सलाह दी गई। साथ ही बताया गया है कि ऐसे स्वास्थ्य का नवजात के शरीर पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। काफी गर्भवतियों को अस्पताल से दवाएं भी मुहैया कराई गईं।

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