परमात्मा को पसन्द है निर्मलता: डा. मदन मोहन

परमात्मा को पसन्द है निर्मलता: डा. मदन मोहन
चौकियां धाम, जौनपुर। निर्मल तन वाले को परमात्मा के पास तक जाना पड़ता है जबकि निर्मल मन वाले के पास परमात्मा स्वयं चलकर जाता है। उक्त बातें शीतला चौकियां धाम में अधिकमास भर चलने वाले श्रीराम कथा महोत्सव के 28वें दिन वाराणसी से पधारे मानस कोविद डा. मदन मोहन मिश्र ने कही।
उन्होंने 28वें मास पारायण के अन्तर्गत रावण वध की चर्चा करते हुये कहा कि परमात्मा न सिद्ध देखता है और न गिद्ध देखता है। वह अन्त:करण की शुद्धता देखता है। रावण जैसा सिद्ध भी यदि किसी अबला नारी सीता को कुदृष्टि से हरण करता है तो श्रीराम उसे कुत्ते की मौत मार देते हैं। वही कोई गिद्ध भी सीता की रक्षा के लिये अपने जान की बाजी लगा देता है तो श्रीराम उसे बाप बनाकर तार देते हैं। जब तक भाई—भाई का भेद नहीं बताता तब तक उसको परमात्मा भी नहीं मार सकता।
उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम ने रावण का अन्तिम संस्कार उसकी संस्कृति के अनुसार विभीषण से कराया। इसी क्रम में डा. अखिलेश चन्द पाठक ने पुरुषोत्तम मास महात्म्य का बडा सारगर्भित प्रवचन किया। कार्यक्रम का संचालन गुड्डू उपाध्याय ने किया। आयोजक शिवाश्रय गिरी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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