मेडिकल कालेज, जौनपुर में मनाया गया विश्व वाणी दिवस
जौनपुरः उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, जौनपुर की प्राचार्य प्रो० डा० रुचिरा सेठी एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, प्रो० डा० ए०ए० जाफरी के दिशा निर्देश में ई०एन०टी० विभाग की विभागाध्यक्ष, डा० राजश्री यादव एवं सहायक आचार्य, डा० बृजेश कुमार के संयुक्त तत्वाधान में दिनांक 16 अप्रैल, 2025 को "विश्व वाणी दिवस" कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारम्भ प्राचार्या प्रो० डा० रुचिरा सेठी ने अपने उद्बोधन से किया। उन्होंने बताया कि विश्व वाणी दिवस की इस वर्ष की थीम "Empower your voice" है। प्राचार्या ने हर आयु वर्ग के लोगो में वाणी को लेकर जागरूक किया कि "वाणी न केवल विधारों को प्रकट करने का माध्यम है, बल्कि यह व्यक्तित्व की पहचान और संस्कृति का दर्पण भी है। विश्व वाणी दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि वाणी की शक्ति को सही दिशा में प्रयोग कर हम समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते है।" तपश्चात मेडिकल कालेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, डा० ए०ए० जाफरी ने विश्व वाणी दिवस पर चर्चा करते हुए बताया कि विश्व वाणी दिवस प्रतिवर्ष 16 अप्रैल को मनाया जाता है। इस दिन की शुरूआत 1999 में ब्राजील देश के एक समूह द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य था मानव वाणी के महत्व को पहचान देना, और लोगों को स्वरयंत्र के स्वास्थ्य व देखभाल के प्रति जागरूक करना। बाद में 2002 से यह एक अंतरराष्ट्रीय पहल के रूप में सामने आया, और आज यह दुनिया भर में मनाया जाता है। "आपकी वाणी ही आपके व्यक्तित्व की असली पहचान है। एक मधुर, मर्यादित और प्रेरणादायक वाणी न केवल संवाद को सशक्त बनाती है, बल्कि समाज में सौहार्द और सद्भावना को भी बढ़ावा देती है।" विश्व वाणी दिवस पर ई०एन०टी० विभाग की विभागाध्यक्ष, डा० राजश्री यादव ने विस्तृत जानकरी देते हुए बताया कि आज के डिजिटल युग में संवाद का महत्व और भी बढ़ गया है। शिष्ट, प्रभावशाली और संवेदनशील वाणी ही सशक्त नेतृत्व और समर्पित नागरिक की पहचान है। वाणी से संबंधित विभिन्न बीमारियों के बारे में जागरूक करते हुए बताया कि जैसे हकलाना, आवाज बैठना, गले में गांठ या स्वरयंत्र की खराबी को शुरूआती पहचान लेना इलाज को आसान बनाता है। वाणी में समस्या टॉन्सिल, एलर्जी, संक्रमण, वोकल कॉर्ड्स की सूजन या ट्यूमर के कारण भी हो सकती है। तनाव और अत्यधिक बोलने की आदत भी आवाज पर असर डाल सकती है। वाणी की समस्या से पीड़ित लोगों को हमेशा धूम्रपान, अधिक गर्म चाय-कॉफी, तथा अत्यधिक ठंडा पानी और शोरगुल वाले माहौल से दूर रहना चाहिए। यह एक ला-इलाज बीमारी नहीं है मरीज के नियमित परहेज एवं दवा से इसे जड़ से खत्म किया जा सकता है। ई०एन०टी० विभाग के सहायक आचार्य, डा० बृजेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि "वाणी केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि यह हमारे संस्कारों, सोच और व्यक्तित्व की सजीव झलक होती है। विश्व वाणी दिवस हमें इस बात की याद दिलाता है कि हमारी वाणी में कितना सामर्थ्य है वह प्रेरित कर सकती है, सुधार सकती है और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।" कार्यक्रम का संचालन डा० रिमांशी द्वारा किया गया। इस अवसर पर चिकित्सा शिक्षक प्रो तबस्सुम यासमीन, प्रो० भारती यादव, प्रो० उमेश सरोज, डा० विनोद कुमार, डा० अरविन्द पटेल, डा० चन्द्रमान, डा० सरिता पाण्डेय, डा० ममता, डा० हमजा अंसारी, डा० आशुतोष सिंह, डा० आदर्श यादव, डा० मुदित चौहान, डा० संजीव यादव, डा० अर्चना, डा० अलिसा अंजुम, डा० प्रीति, डा० अजय व अन्य चिकित्सक, नर्सिंग अधिकारी, पैरामेडिकल स्टाफ, छात्र/छात्राएं, मरीज व कर्मचारीगण की उपस्थिति में कार्यक्रम अत्यंत सफल और प्रेरणादायक रहा।
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