इसके बाद वह आपरेशन थियेटर (ओटी) में गईं और कर्मचारियों को चीजें व्यवस्थित कर रखने को कहा। उन्होंने कहा कि यह प्रथम संदर्भन इकाई (एफआरयू) है। इसलिए महीने में कम से कम पांच आपरेशन होने चाहिए। उन्होंने पैरों से संचालित सेक्शन मशीन देखा और बोलीं, यहां पर एक इलेक्ट्रिक सेक्शन मशीन भी होना चाहिए जिसकी व्यवस्था करने के लिए पत्राचार किया जाए। आपरेशन के सारे इक्वीपमेंट स्टेरलाइज होने चाहिए। आपरेशन थियेटर में एसी नहीं लगा था जिस पर उन्होंने एसी लगवाने का निर्देश दिया।
इसके बाद वह प्रसव कक्ष पहुंचीं। वहां हो रहे प्रसव को ध्यान में रखते हुए अंदर नहीं गईं। बाहर से ही स्टाफ को निर्देश दिया, यदि कोई दिक्कत हो तो जिला मुख्यालय से सामान की मांग करिए। एक्स-रे रूम में भी गईं और पूछा इससे एक्स-रे होता है? स्टाफ ने बताया कि एक्स-रे मशीन काम करती है। निरीक्षण के समय डॉ दिवा त्यागी, डॉ शाहिद अख्तर, इम्युनाइजेशन आफिसर विनोद कुमार मौर्या, कुष्ठ रोग विभाग में रमेश गौड़, फार्मासिस्ट उदयभान यादव, स्टाफ नर्स माधुरी देवी, अमरावती और तेतरादेवी, नेत्र परीक्षण अधिकारी राजेश कुमार कनौजिया सहित कई अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
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