ईमानदारी, परिश्रम, संघर्ष,समर्पण से मिलती है मंजिल - राज्यपाल


जौनपुर- मंजिल प्राप्त करना है तो संघर्ष करना होगा । संघर्ष के बिना जीवन अधूरा है। देश सेवा और समाज सेवा के लिए त्याग की आवश्यकता जरुरी है । अगर मानव के भीतर संघर्ष, देश सेवा,त्याग के साथ -साथ  समाजसेवा का भाव नहीं है तो तो वह इंसान पशु के सामान होता है ।                                
उक्त बाते प्रदेश के महामुहिम राज्यपाल रामनाइक ने भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैदर अब्बास चाँद से शिष्टाचार भेंट वार्ता के दौरान लखनऊ में अपनी स्वरचित पुस्तक चलते रहो- चलते रहो को भेंट कर कही । उन्हों ने कहा की मैंने अपने जीवन में देश और समाज के लिए काफी संघर्ष किया है। मेरे कठिन संघर्षो का परिणाम ही मुझे आज इस मुकाम पर पहुंचाया है। उन्होंने कहा की मेरी यह पुस्तक समाज को एक नूतन चेतना की ओर ले जाएगी और लोगों को देश और समाज की भलाई के लिए प्रेरित करेगी । उन्होंने आगे कहा की जब- जब मानव अपने लक्ष को प्राप्त करने के लिए अपनी मंजिल के पथ पर निरंतर आगे चलता रहेगा तब- तब मंजिल खुद आगे बढ़ कर उसके क़दमों को चूम लेगी । इसलिए प्रत्येक मानव का यह नैतिक कर्तव्य है की वह अपने जीवन में जो भी करे उसे सच्चाई, ईमानदारी, कठिन परिश्रम और समर्पण भाव के साथ करे । उक्त आशय की जानकारी भाजपा युवा नेता मुहम्मद अजमी ने दी ।

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