जलालपुर , जौनपुर । जिस प्रकार एक मकान को बनाने के लिए ठोस बुनियाद की जरुरत होती है उसी प्रकार समाज , देश ,उद्योग , व्यवसाय को खडा करने के लिए मजदूरों की जरुरत होती है । क्यूंकि मजदूर हमारे समाज का वह तबका है जिस पर देश व समाज की उन्नति टिकी होती है । इसलिए की मजदूर ही वह तबका है जो अपना श्रम बेचता है और बदले में न्यूनतम मजदूरी लेता है । यही कारण है की मजदूर को समाज का महत्त्व पूर्ण अंग माना जाता है और देश की तरक्की का भार भी इन्ही के कन्धों पर होता है । इसके बावजूद समाज की निगाहें इन्हें उपेक्षा की दृष्टि से देखती है । यही कारण है की क्षेत्र में एक मई के दिन अधिकाँश मजदूर अपने - अपने कामों में व्यस्त रहे । उनके काम करने की लालसा और दो वक्त की रोटी के लिए श्रम करते देख ऐसा प्रतीत होता है की आज के दिन भी लोग मजदूर दिवस से अनजान हैं ।

ईंट भट्ठों से लेकर कल कारखानों में भी मजदूर तबका आज के दिन भी श्रम के माध्यम से अपना पसीना बहाता रहा क्यूँ की उसे यह पता नहीं की मजदूर दिवस क्या है । मजदूर दिवस के दिन भी मजदूर श्रम करते रहे । होटलों , ढाबों से लेकर गैरेजों और प्राइवेट वाहनों पर भी बाल मजदूर एक मई के दिन मजदूर दिवस से बेखबर रहे । गौर तलब है की ४ मई वर्ष १८८६ ई को शिकागो के मार्केट चौक पर मजदूरों का जमावड़ा लगा हुआ था । इसका प्रमुख कारण था की मजदूरों से दिन भर काम कराया जाता था और मजदूरी भी कम दी जाती थी । मजदूरों के जमावड़े को देख वहां पुलिस भी तैनात थी की इसी बीच आज्ञात व्यक्ति ने मजदूरों पर बम फ़ेंक दिया जिससे वहां भगदड़ मच गई और पुलिस ने भी मजदूरों पर गोलियां चलानी शुरू करदी जिससे काफी संख्या में मजदूरों की मौत हो गई । इस घटना के बाद वर्ष १८८९ई में अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मलेन में यह एलान किया गया की शिकागो के नरसंहार में मारे गए निर्दोष मजदूरों की याद में १ मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जायेगा और इस दिन सभी मजदूरों का अवकाश भी रहेगा । बावजूद इसके जानकारी के अभाव में आज भी १ मई के दिन मजदूर तबका काम करता हुआ दिखाई देता है । विशेष कर बाल मजदूरों को इस दिन के बारे में किसी प्रकार की कोई जानकारी नहीं है और न तो सामाजिक संगठन व स्वयं सेवी संगठनो द्वारा श्रमिकों व बाल मजदूरों को इसकी जानकारी मुकम्मल तौर पर देने का प्रयास ही किया जाता है ।
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